STORYMIRROR

Abhishek Shukla

Others

2  

Abhishek Shukla

Others

वक़्त

वक़्त

1 min
125

एक वक़्त था जब हँस कर मिलता था सबसे

अब बिना मुस्कुराये ही शाम हो जाती है


जिंदगी भी कुछ बीत रही है ऐसे,

रूह चुका रही हो कोई पुराना कर्ज जैसे


कितनी छोटी सी दुनिया है मेरी,

एक मैं हूँ और एक तन्हाई मेरी!!


कैसी बित रही है जिंदगी मत पूछ अभिषेक

ऐसे दौर से गुजर रहा हूँ, जो कमबख्त

गुजरता ही नहीं !



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन