तो क्या हुआ ?
तो क्या हुआ ?
लोग मुझसे रूठ गए,
अपने पीछे छूट गए,
तो क्या हुआ ?
समय विकट है,
कोई ना निकट है,
तो क्या हुआ ?
हर मोड़ नई चुनौती है,
आँखें हर रात रोती हैं,
तो क्या हुआ ?
तो क्या हुआ जो
हर चीज़ विपरीत है
विपत्तियां नज़दीक हैं
और कुछ भी ना ठीक है !
तो क्या हुआ जो
अपने बेगाने हो गए,
साथ जिनके देखे थे सपने
वो क़िस्से पुराने हो गए !
सब कुछ बदलता रहता है
इस धारा में
ख़ुद पे भरोसा और
विश्वास अटल होना चाहिए,
कठपुतलियां हैं हम
उसके हाथों की,
जिस ढंग नचाये
नाचते रहना चाहिए...!
