AKIB JAVED
Abstract
तंज
वाणी को अनियंत्रित
अमर्यादित
असभ्य बनाना
पड़ता है।
मस्तिष्क में
किसी के प्रति
नकारात्मक
विचारों का प्रवाह
उफान में जब
होता है,
तब वाणी में
विचारों का
ज्वाला
वाणी से
गुजरते हुए
अन्य के
प्रवेश करता है
तंज के रूप में।
नया साल
जीवन के रंग
सागर
बादल
किसे कद्र हैं...
फटा जूता
तेरी ही लगन
बोझ गम का ...
हम गमों को भु...
मेरे गाँव की ...
मत भूलिए हुज़ूर, लगाम आपके हाथ में है। मत भूलिए हुज़ूर, लगाम आपके हाथ में है।
तन्हाइयों में अक्सर खुद से बात कर लेता हूं। तन्हाइयों में अक्सर खुद से बात कर लेता हूं।
जिनका परिवार होता है उनका सुखी संसार होता है। जिनका परिवार होता है उनका सुखी संसार होता है।
बनाता है दिल को प्रसन्न वही है देश का हीरा बनाता है दिल को प्रसन्न वही है देश का हीरा
कभी चांद फिर कभी चांदनी कहलाती। कभी चांद फिर कभी चांदनी कहलाती।
जिंदगी के इम्तहान में साथ नहीं देते और हम जीना इनके बिना सीख जाते हैं। जिंदगी के इम्तहान में साथ नहीं देते और हम जीना इनके बिना सीख जाते हैं।
नीली छत वाले से उसकी छत मांग लेता हूँ। नीली छत वाले से उसकी छत मांग लेता हूँ।
ये ही तो पालनहार हमारे देव तुल्य पिता हमारे। ये ही तो पालनहार हमारे देव तुल्य पिता हमारे।
लिखा पता ना लिखी है तारीख देश-काल की यही है सीख। लिखा पता ना लिखी है तारीख देश-काल की यही है सीख।
खतरे में है, बालक तेरे, दानव हमारे है सिर पे खड़ा है ईश्वर! मेरे सखा, एक तु ही है आसरा। खतरे में है, बालक तेरे, दानव हमारे है सिर पे खड़ा है ईश्वर! मेरे सखा, एक तु ही...
प्यार एक एहसास जो केवल .. महसूस किया जा सकता प्यार एक एहसास जो केवल .. महसूस किया जा सकता
जब तक हो अपनों का साथ बस तब तक आबाद है जिंदगी। जब तक हो अपनों का साथ बस तब तक आबाद है जिंदगी।
ये आंसू जो खुशी में मुस्कुराते हैं गम में दामन भिगो जाते हैं। ये आंसू जो खुशी में मुस्कुराते हैं गम में दामन भिगो जाते हैं।
बेजुबान भी जो है बोल पाए यही तो है प्यार की भाषा। बेजुबान भी जो है बोल पाए यही तो है प्यार की भाषा।
फिर भी वो ही कृतघ्न लोग मौका पाकर हमें ही आजमाते हैं। फिर भी वो ही कृतघ्न लोग मौका पाकर हमें ही आजमाते हैं।
सुना है सदियों पहले,थे हम जानवर पथ प्रगति चले, बनके आदमी। सुना है सदियों पहले,थे हम जानवर पथ प्रगति चले, बनके आदमी।
त्याग, सेवा ही धर्म है प्रजा-हित ही राज धर्म। त्याग, सेवा ही धर्म है प्रजा-हित ही राज धर्म।
ये ज़िन्दगी का खेल है नियम अजीब हैं यहाँ के ये ज़िन्दगी का खेल है नियम अजीब हैं यहाँ के
प्यार में शर्त नहीं होती नफा- नुकसान नहीं होता। प्यार में शर्त नहीं होती नफा- नुकसान नहीं होता।
ज़िंदगी किताबों से हटाकर जी जाए। ज़िंदगी किताबों से हटाकर जी जाए।