STORYMIRROR

Pushp Lata Sharma

Abstract

3  

Pushp Lata Sharma

Abstract

तकदीर लिखता है

तकदीर लिखता है

1 min
268

कभी खुशियों का मौसम तो कभी वह पीर लिखता है

विधाता फूल की माला कभी जंजीर लिखता है।


बिना मर्जी के उसकी एक पत्ता भी नहीं हिलता

वही तो हर किसी इंसान की तकदीर लिखता है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract