थक गया हूं मैं।
थक गया हूं मैं।
ज़िन्दगी दो कदम तू भी तो चल मेरे साथ...
अकेला चलते-चलते अब तो थक गया हूं मैं।।1।।
आ बैठ मेरे पास कर कुछ थोड़ी सी बात....
तन्हा खुद कहते-सुनते अब तो रह गया हूं मैं।।2।।
शिकवा नहीं है तुझसे गुज़ारिश सी है मेरी...
दे सुकूँ के थोड़े से पल गमों से भर गया हूं मैं।।3।।
हो गया हूं बड़ा ही तन्हा तेरे इस सफर में...
हमसफ़र है ना कोई राहों पर रुक गया हूं मैं।।4।।
यूँ गुमसुम सी तू कब तक रहेगी मेरे साथ...
ज़िंदा होकर भी लगे जैसे अब मर गया हूं मैं।।5।।
मयखाने महफ़िल में आज देर तक रुका...
हो गयीं थी काफी ही रात तब घर गया हूं मैं।।6।।
