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Madhu Vashishta

Inspirational

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Madhu Vashishta

Inspirational

तेरी नजर

तेरी नजर

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तेरी नजर का जादू कुछ ऐसा चला था।

औरों की तो छोड़ो

मैं तो खुद को भी भूला था।


केवल नजरों से नहीं तू मन से भी सुंदर थी,

मेरे कर्तव्य परायण होने की इच्छा जो तूने की थी।

खुद को साबित करने को मैं कुछ भी कर सकता था।

तेरे मन में रहने को मैं बहुत तड़पता था।


मातृभूमि की सेवा के लिए तूने तिलक जो लगाया था।

उस समय तूने जो छुपाए थे आंसू मैं वह भी देख पाया था।


आज लहूलुहान बदन है।

कंठ में आया दम है।

लेकिन देश का झंडा मैंने ऊंचाई पर ही लहराया था।

प्राण निकल गए लेकिन मैं सदा के लिए तेरी आंखों में ही समाया था।


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