STORYMIRROR

Meenakshi Sharma

Inspirational

4  

Meenakshi Sharma

Inspirational

तेरा मन तेरी सी कविता

तेरा मन तेरी सी कविता

1 min
437

तेरा मन तेरी सी कविता

मेरा मन मेरी सी कविता

बहती निःशब्द शब्द सरिता 

जैसा मन वैसी ही कविता


अब प्रेम लिखूं या विरह लिखूं

जीवन बीता किस तरह लिखूं

सृष्टि ने पग पग प्रेम रचा

जो भाग्य में था वो मुझे मिला

जो हाथ आया देखा न कभी

जो बीत गया वो ही पता चला

बहका मन बहकी सी कविता

महका मन महकी सी कविता

जीवन छोटा चाहत अमिता

जैसा मन वैसी ही कविता


चलो आगमन प्रस्थान लिखूं

भये कैसे स्वप्न निष्प्राण लिखूं

आए थे जो खुशियां देने

दे कर अनेक अवसाद चले

मैंने वो भी सिर माथे धारे

इस जग से जो प्रसाद मिले

आता मन आती सी कविता

जाता मन जाती सी कविता

थी समय की भी गति त्वरिता

जैसा मन वैसी ही कविता


कहो मेल लिखूँ या द्वन्द्व लिखूँ

या जीवन का मकरन्द लिखूँ

भीतर कितने ही द्वन्द्व चले 

पर होंठों पर तो मौन पले

कोई भीष्म हुआ कोई अर्जुन

सब वक्त के साँचे में ही ढले

भीगा मन भीगी सी कविता

रीता मन रीति सी कविता

कोई काव्यखण्ड कोई गीता

जैसा मन वैसी ही कविता।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational