Sandeep Sharma
Horror
तबाही का मंजर भी शरमाएगा
जब सामने हमें पाएगा।
वयं रक्षाम् व...
दीप
सपने
बुजुर्ग
परिश्रम
तानाशाही
ताकत
सरस्वती मंदिर
पर्यटन
प्रेम
विजय तिलक करे रणचंडी भी, रख, होठों पर मुस्कान। विजय तिलक करे रणचंडी भी, रख, होठों पर मुस्कान।
खा लिया हैं चोट दिल ने बह रहे अब आंसू की धार। खा लिया हैं चोट दिल ने बह रहे अब आंसू की धार।
रात के सन्नाटे में छत पर पड़ी जो नज़र मेरी। रात के सन्नाटे में छत पर पड़ी जो नज़र मेरी।
सुकून भरी सहज कलकल है जीवन ही जल है। सुकून भरी सहज कलकल है जीवन ही जल है।
बेवजह न घर से निकलो, हर सावधानी पर ध्यान करों। बेवजह न घर से निकलो, हर सावधानी पर ध्यान करों।
फिर मास्क लगाकर बाहर निकलते सब, इस तरह ही बच पाते हैं वायरस से ! फिर मास्क लगाकर बाहर निकलते सब, इस तरह ही बच पाते हैं वायरस से !
बीता काल कोरोना , करके सब वीरान भले चंगे गिरफ्त लिए , खूब बना शैतान। बीता काल कोरोना , करके सब वीरान भले चंगे गिरफ्त लिए , खूब बना शैतान।
तू एक बार बिना सूर्य का सवेरा बनकर तो देख। तू एक बार बिना सूर्य का सवेरा बनकर तो देख।
एक दीये का प्रकाश पाकर जगमगाने लगते हैं और ले जाते हैं मंजिल की ओर बेधड़क, निर्भय। एक दीये का प्रकाश पाकर जगमगाने लगते हैं और ले जाते हैं मंजिल की ओर बेधड़क, निर...
कंकाल देखकर मैं जागा, रजाई से निकलकर मैं भागा।। कंकाल देखकर मैं जागा, रजाई से निकलकर मैं भागा।।
भारत का स्वाभिमान है जैसे किया रसपान है। भारत का स्वाभिमान है जैसे किया रसपान है।
हमपे कर्ज है अपने वतन का यह , दो पल की जिंदगी।। हमपे कर्ज है अपने वतन का यह , दो पल की जिंदगी।।
आंखों में थे शोले, कोई कैसे उससे बोले, आंखों में थे शोले, कोई कैसे उससे बोले,
यूँ तो दिखता सही सलामत हूँ पर ओ डरावनी बातें दिल को दहला गयी है। यूँ तो दिखता सही सलामत हूँ पर ओ डरावनी बातें दिल को दहला गयी है।
कुछ भी करो पर ये तो बताओ किस जन्म का बैर निभाते है। कुछ भी करो पर ये तो बताओ किस जन्म का बैर निभाते है।
जो उनके खून- पसीने की कीमत से उपजाई गई है। जो उनके खून- पसीने की कीमत से उपजाई गई है।
इस लोकतांत्रिक देश में तमाशा बना दिया है जय अराजकतावाद। जय बेशर्मी। जय मक्कार। इस लोकतांत्रिक देश में तमाशा बना दिया है जय अराजकतावाद। जय बेशर्मी। जय मक्का...
हाथ पकड़ कर एक दूसरे का लंबी डोर जैसी हमारी पंक्ति। हाथ पकड़ कर एक दूसरे का लंबी डोर जैसी हमारी पंक्ति।
मानवता सब भूल जायेंगे, इंसान, अकेला खड़ा रह जायेगा। मानवता सब भूल जायेंगे, इंसान, अकेला खड़ा रह जायेगा।
न समय पल पढ़ना, न समय पर गृहकार्य हो जाएगा सब किया धरा भी बेकार। न समय पल पढ़ना, न समय पर गृहकार्य हो जाएगा सब किया धरा भी बेकार।