Ankita Parkhad
Action Inspirational Thriller
जिंदगी की दौड़ में हम यूं ही गिरते पड़ते
फिर चलना सीखते
कभी सुकून मिलता तो कभी चिड़चिड़ापन
कभी निभाना पड़ता तो कभी तोड़ना
अलग है रास्ते पर मंजिल एक
जायेंगे हम यूं ही एक ही पार
मोक्ष
निर्भरता
ताकत
शांति की डगर
अंधेरी रात
कला
सुनहरापन
आगे बढ़
भक्ति
प्यार
मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है। मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है।
व्याधियां प्रदत्त सूक्ष्म जीवों से, मानव पर तो हैं ढा रहीं प्रलय। व्याधियां प्रदत्त सूक्ष्म जीवों से, मानव पर तो हैं ढा रहीं प्रलय।
यह कश्मीर तो ना देंगे हम वह कश्मीर भी ले लेंगे इस धरती मैया की खातिर जान भी अपनी दे दे यह कश्मीर तो ना देंगे हम वह कश्मीर भी ले लेंगे इस धरती मैया की खातिर जान भी अ...
आँचल में छुपा कर घर रखा तो वीर कहाँ से आयेंगे जब मुश्किल से टकराएंगे अभिनन्दन बन पायेंगे। आँचल में छुपा कर घर रखा तो वीर कहाँ से आयेंगे जब मुश्किल से टकराएंगे अभिनन्दन...
मर्यादा मर रही प्रतिदिन अत्याचार, अन्याय, भय, भ्रष्टाचार पर्याय युवा बन रहा है मर्यादा मर रही प्रतिदिन अत्याचार, अन्याय, भय, भ्रष्टाचार पर्याय युवा बन रह...
मुझे संघर्ष एवं संभावनाओं की असीमितता पर मुझे संघर्ष एवं संभावनाओं की असीमितता पर
सब को आँचल की छाया में बिठाकर, खुद सहती है धूप सब को आँचल की छाया में बिठाकर, खुद सहती है धूप
असंख्य शत्रु सामने, गिरे न स्वेद भाल से। स्वदेश के लिए लड़ो, महा कराल काल से॥ असंख्य शत्रु सामने, गिरे न स्वेद भाल से। स्वदेश के लिए लड़ो, महा कराल काल से॥
सब मिलकर भरते रहे उसमें पूरा जोश उसको अपने कर्म का किंतु तनिक रहा न होश सब मिलकर भरते रहे उसमें पूरा जोश उसको अपने कर्म का किंतु तनिक रहा न होश
नौजवानों इस वतन का कल है हाथों में तुम्हारे। नौजवानों इस वतन का कल है हाथों में तुम्हारे।
बिना अनुमति कुछ भी नहीं करते फिर भी पाबंदियाँ, कानून का डर हमें ही है बिना अनुमति कुछ भी नहीं करते फिर भी पाबंदियाँ, कानून का डर हमें ही है
यह कविता शहीदो को सलामी दे रही है। यह कविता शहीदो को सलामी दे रही है।
नई ऊर्जा और हिम्मत का संचार कर खुद को खुद के लिए खास बना पाती हूँ मैं।। नई ऊर्जा और हिम्मत का संचार कर खुद को खुद के लिए खास बना पाती हूँ मैं।।
विनम्रता आभूषण धीर वीर गंभीर नैतिक मूल्यों का मानव मानवता का पराक्रम अग्रदूत टकराव नही विनम्रता आभूषण धीर वीर गंभीर नैतिक मूल्यों का मानव मानवता का पराक्रम अग्रदूत ...
संविधान में केवल अधिकारों की मांग नहीं लिखी, राष्ट्र अखंडता और एकता के भी लेख दिए होंगे संविधान में केवल अधिकारों की मांग नहीं लिखी, राष्ट्र अखंडता और एकता के भी लेख द...
अब चला चली की बेला है, गुडबाय सभी को करता हूं।। अब चला चली की बेला है, गुडबाय सभी को करता हूं।।
पीपल का हूँ वृक्ष अभागा सूखे नयनन कृश है काया। पीपल का हूँ वृक्ष अभागा सूखे नयनन कृश है काया।
अपनी नियति अपने हाथों से अब हम स्वयं संवारेंगे। अपनी नियति अपने हाथों से अब हम स्वयं संवारेंगे।
हम सब कविता के एक एक शब्द को आत्मसात कर रहे थे आनंद ले रहे थे। हम सब कविता के एक एक शब्द को आत्मसात कर रहे थे आनंद ले रहे थे।
हर बात का समाधान समाज की रूढ़िवादी सोच के आगे चुप रह जाना नहीं होता हर बात का समाधान समाज की रूढ़िवादी सोच के आगे चुप रह जाना नहीं होता