STORYMIRROR

Ankita Parkhad

Abstract

3  

Ankita Parkhad

Abstract

शांति की डगर

शांति की डगर

1 min
8

दिन में उजाला रात में अंधेरा

तू मेरे लिए है परिंदा 

जहां मन चाहे

वही खिंची चली जाऊं 

बस तेरा हाथ थाम

कर सारी डागरिया पार कर जाऊं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract