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Ankita Parkhad

Abstract

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Ankita Parkhad

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शांति की डगर

शांति की डगर

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दिन में उजाला रात में अंधेरा

तू मेरे लिए है परिंदा 

जहां मन चाहे

वही खिंची चली जाऊं 

बस तेरा हाथ थाम

कर सारी डागरिया पार कर जाऊं।


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