स्वयं
स्वयं
भगवान ने दिये है हमें प्राण,
अपनी शक्ति से बनाया है हमें इंसान।
इस बात का सदैव रहकर आभारी,
कभी नहीं पड़ने देना चाहिए किसी भी विपदा को हम पर भारी।
अपनी समस्या को स्वयं के हाथों में लेकर,
नहीं रहना है समय पर निर्भर।
अपने हर समस्या का स्वयं समाधान हैं हम,
वही समय से अपेक्षा कर होता है हमें गम।
परमेश्वर ने जब दिया है हमें इतना बल,
तो क्यों इस बात की प्रतीक्षा करें,कि कब आएगा कल?
जब हम अपने कर्तव्य को कर देते हैं अस्वीकार,
तब कृपा की उपेक्षा होती है बेकार।
किंतुे लेकर अपने कर्मों का दायित्व,
अब हमें स्वयं करने हैं अपने चुनावों का नेतृत्व।
जिससे हम पहुंचेंगे अपने लक्ष्य की ओर,
क्योंकि हमारे कर्मों की हम से बंधी होगी डोर।
गलती पश्चात हमें करना होता है पश्चाताप,
तो क्यों ना उससे बेहतर अपना कार्य कर उठाएं लाभ।
इसी को बनाकर अपने जीवन का सार,
कर सकते हैं हम कठिनाइयों को पार।
