स्वर्ग
स्वर्ग
इज्ज़त खूब कमाना तुम
महफ़िल ईमान सजाना तुम
गरीबों को ना सताना तुम
अमीरों को ये बताना तुम
कुछ पल सुकून से बिताना तुम
कभी खुद से भी मिल जाना तुम
दुनिया की सैर कर आना तुम
खुशियों के पंख लगाना तुम
मेहनत के दीप जलाना तुम
निष्ठा से कदम बढ़ाना तुम
नीयत साफ़ रखना तुम
दूसरों को माफ़ करना तुम
लक्ष्य को अडिग बनाना तुम
कुशल पथिक बन जाना तुम
सत्य का मार्ग अपनाना तुम
ना किसी को तड़पाना तुम
मददगार सिद्ध होना तुम
उपकारबद्ध होना तुम
संस्कार ना भूल जाना तुम
शिष्टाचार निभाना तुम....
अपनों के करीब रहना तुम
इस को नसीब कहना तुम
कभी रूठना तो कभी मनाना तुम
कभी फटकार तो कभी प्यार जताना तुम
सदा कर्म करते जाना तुम
यूं ही सत्कर्म कमाना तुम
पाप से बचकर जाना तुम
धरती को स्वर्ग बनाना तुम।
