एक ख़त भारत मा के नाम
एक ख़त भारत मा के नाम
एक ऐसा खत भी कभी भारत मा के नाम लिख देना,
कलम जब भी उठाना तो मेरा ये पैगाम लिख देना।
मेरे देश क काबिल मेरी एक पहचान लिख देना,
मर जाउ तो तन के हर हिस्से पर हिन्दुस्तान लिख देना।
मुझे मंदिर भी प्यारा है मुझे मस्जिद भी प्यारी है,
कहीं पे राम लिख देना तो कहीं रहमान लिख देना।
कहीं गीता लिख देना तो कहीं क़ुरान लिख देना,
वतन जब भी लहू माँगे तो मेरा नाम लिख देना।
मैं किस मिट्टी से हूँ यारो मेरी पहचान लिख देना,
कफ़न के इस कोने पे तुम हिन्दुस्तान लिख देना।
कफ़न के उस कोने पे भारत माँ का नाम लिख देना,
कहीं विंध्याचल लिख देना तो हिमालय की शान लिख देना।
गंगा जमुना सरस्वती के संगम का स्थान लिख देना,
देश के होनहार डॉकटरों का सम्मान लिख देना।
देश बढ़ाने वाले काबिल इंजिनियरों का काम लिख देना,
ज़य विज्ञान लिख देना जय किसान लिख देना।
लाल स्याही की क़लम से तुम वीर जवान लिख देना,
मेरे देश के प्यारे बच्चों की मुस्कान लिख देना।
देश क हर ईमानदार नागरिक का ईमान लिख देना,
नेता कोई बेचे देश को तो उसका अंजाम लिख देना।
दुश्मन कोई देखे इधर तो उसका इंतकाल लिख देना,
लिया हुआ देश का हर इंतकाम लिख देना।
हर पन्ने क उपर मेरा भारत महान लिख देना,
स्वर्णिम अक्षर से देश का राष्ट्रगान लिख देना।
तिरंगे की आन लिख देना तिरंगे की शान लिख देना,
मुझे लिखना कभी तो आगे हिन्दुस्तान लिख देना।
