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Goldi Mishra

Inspirational

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Goldi Mishra

Inspirational

स्वाधीनता

स्वाधीनता

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सदियां गुज़र गई और वो काला दौर भी धुंधला हो रहा है,

मेरा हिंद अपनी नई कहानी खुद लिख रहा है।

वे वीर सपूत झुके नहीं रुके नहीं अटल निश्चल लड़ते रहे,

स्वाधीनता की लड़ाई में तिरंगा थामे आगे बढ़ते रहे,

विचार निश्चल थे,

इरादे वतन पर मर मिटने के थे,

सन् 1947 में वो दौर आखिर खतम हुआ,

अपना नया कल फिर लिखने का सवेरा हुआ,

रात काली गुलामी की बीत गई,

मातृभूमि को खोई गरिमा मिल गई,

हिंदुस्तान चला एक नए सफ़र पर,

नई उन्नति और प्रतिभा को सीखने की राह पर,

लिखने बैठे सर्वप्रथम अपना संविधान हम,

बांधने में जुट गए एक सूत्र में हिंदुस्तान हम,

हर विविधता और भिन्नता को सम्मान दिया,

दक्षिण,उत्तर,पूर्व, पश्चिम, हर क्षेत्र को सशक्त किया,

बंजर भूमि में नए अंकुर फूटे,

उद्योग क्षेत्र में नए व्यवसाय जन्मे,

कई बार आहत हमे हमारे पड़ोसी ने किया,

पर हमारे मुल्क ने हर वार का सामना डट कर किया,

देश को अपना दूरदर्शन मिला,

जनसंपर्क का क्षेत्र और विस्तृत हुआ,

सरकारें पलटी और नए विकल्प मंच पर आए,

हिंदुस्तान ने अपनी विजय के परचम हर ओर शान से लहराए,

दौर नब्बे का जो आया,

परमाणु परीक्षण कर हिंदुस्तान विश्वगुरु कहलाया,

अंतरिक्ष की सैर कर चांद और मंगल को छू आए,

तकनीकी क्षेत्र में हम उभरते सितारे बन गए,

सिहाई नया हर रोज़ लिखती रही,

साहित्य के क्षेत्र में भी हिंद की सुनहरी कलम खिलती रही,

खेल कूद के क्षेत्र में स्वर्ण पदक हमारे हिस्से आए,

राष्ट्र गौरव की छाप हर क्षेत्र में हम छोड़ आए,

आत्मनिर्भर भारत के विचार को हमने अपनाया,

अपनी कारीगरी को विश्व से परिचित कराया,

राष्ट्र संघ की उच्च समिति में जुड़ गया भारत,

विश्व स्तर पर नए किस्से लिखने लगा भारत,

काल जब महामारी का आया,

साफ़ सफाई और दो गज दूरी का नारा हमने अपनाया,

पार करके अनेकों पड़ाव,

आज आ गया है पछतरवा साल,

प्रार्थना है मेरी की मेरा हिंद यूं ही आगे बढ़ता रहे,

अपने कल को यूं ही लिखता रहे,।।


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