सुनहरे फूल
सुनहरे फूल
हर क्षण जिंदगी बदलती रहती है
जो कल तक हँसाती थी
वो आज क्यूँ...
खुद, परेशान सी दिखती है ?
दोस्त भी मौसम की तरह
अक्सर बदल जाते हैं
चेहरे फीके-फीके से पड़ जाते हैं।
हमने बार-बार उसे समेटना चाहा
रिश्तों में अपना रंग भरना चाहा।
क्या करें.. जब जिंदगी
इस तरह रूठ जाती है !
सूखे पत्तों की तरह..
बेतरतीब बिखर जाती है !
प्यार को तलाशते-तलाशते
हम दर-दर भटकते फिरते हैं।
थोड़ी सी मनुहार मिलने पर
हम उसे दिल दे बैठते हैं।
पर, अब हमें संभालना होगा
फिसलते जीवन को कसकर
मुठ्ठी में करना होगा।
गहरे हरे जख्म भी
हौसले से भर जायेंगे
प्यार के सुनहरे फूल
कांटों पर फिर से
खिल जाएंगे।
