STORYMIRROR

सीमा शर्मा सृजिता

Inspirational

4  

सीमा शर्मा सृजिता

Inspirational

स्त्री और प्रेम

स्त्री और प्रेम

1 min
489


प्रेम में खोई स्त्री को 

जब मिला नितान्त अकेलापन 

तो उसने लगा लिया सिर माथे 

बांधकर पल्लू में चीखते सन्नाटे 

सुखाकर अपनी आंखों का पानी 

अनसुना कर अतृप्त मन की कहानी 

वो निकल पडी़ एक दिन 

स्वयं की तलाश में 

उसने जाना ईश की तलाश सी

दुर्गम होती है स्वयं की तलाश 

स्वयं को खोजने की राह में 

उससे टकरा गया प्रेम फिर से 

मगर थोडा़ बदला सा 

टपक पडे़ दो बूंद आंसू 

मन की बंजर जमीन पर 

खिल उठा हर कोना 

जैसे आ गया हो बसन्त 

कैद कर लिया उसने 

प्रेम को इस बार 

मन की तिजोरी में 

और फैंक दी चाभी 

सागर के बीचों -बीच 

उसने महसूस किया 

कि खुद को प्रेम करने से 

खूबसूरत कुछ भी नहीं .....

   



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational