STORYMIRROR

Devendraa Kumar mishra

Inspirational

4  

Devendraa Kumar mishra

Inspirational

सोलह सिंगार ले लो

सोलह सिंगार ले लो

1 min
260

मेरे कर्मों के सोलह सिंगार ले लो 

आज की शाम उधार दे दो 

मैं गुनगुनाना चाहता हूं 

कुछ सुनाना चाहता हूं 

मुझे कह लेने दीजिए 

मैं दिल की कहना चाहता हूँ 

मेरी मुस्कान यार ले लो 

अपने ग़मों का तार तार दे दो 

मैं गंगा बनकर सबको पावन करना चाहता हूं 

हिमालय बनकर शत्रुओं को रोकना चाहता हूं 

मैं मंदिर नहीं, मस्जिद नहीं 

गोली खाकर सरहद पर शहीद होना चाहता हूँ 

ऐ माँ मेरी पुकार ले लो 

मेरे जीवन को सुधार दे दो 

फूल बनकर चमन में खुशबू बिखेरना चाहता हूं 

काम कोई आदमी वाला करना चाहता हूं 

मैं राम नहीं, रहीम नहीं 

इंसान हूं, इंसान बना रहना चाहता हूं 

अपने बारूदी विकार दे दो 

मेरी खुशियों के सोलह श्रृंगार ले लो 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational