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Neeraj pal

Inspirational

4  

Neeraj pal

Inspirational

संत- महिमा।

संत- महिमा।

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कामना शून्य जीवन है जिनका,, वही संत कहलाते हैं ।

मन को पल में निर्मल करते ,भव रोग से पार लगाते हैं।।


 पल भर के बैठने मात्र से ,अंतर की तरंगे शांत हो जाती है।

 बिन कहे, बिन माँगे ही, विचार शून्य अवस्था आ जाती है।।


 मन ,बुद्धि के सभी कार्य ,उनके एक इशारे में हो जाते हैं।

 आत्मबल इतना है होता ,स्वाभाविक सबको प्रकाशित कर जाते हैं ।।


पापी, कामी की बात ही छोड़ो, पतितों को भी हृदय से लगाते हैं।

वासनाओं का रंग न चढ़ता , अशुद्ध विचार भी दूर भाग जाते हैं।।


कृपा करना तो काम ही उनका, पतित-पावन वो कहलाते हैं।

भवर- रोग ग्रसित औषधि देकर, सब पर करुणा रस बरसाते हैं।।


राग- द्वेष से भरा प्राणी, जीवन कष्टमय भरा बिताते हैं ।

अनुराग भर ,प्रेम बिखेरते ,जो संत शरण में जाते हैं ।।


सतसंगत रूपी निर्मल गंगा में, जो भी डुबकी लगाता है।

" नीरज "तू भी धो ले मलिन हृदय को, क्यों व्यर्थ ही जीवन गँवाता है।।


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