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Dr. Ritu Chauhan

Abstract


4.5  

Dr. Ritu Chauhan

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सन्नाटे की आवाज़

सन्नाटे की आवाज़

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जिन्होंने कभी सुनी नहीं सन्नाटे की आवाज़

वो क्या जानेंगे दिल में दबी आरज़ू


वो क्या सुनेंगे क्या है दिले कसक

जो कभी हुए न तुम्हारे रूबरू


छूने का एहसास भी न हो जिनको

वो न चाहेंगे कभी कि हो उनके करीब तू


गर फिर भी तू चाहेगा उनसे दिल लगाना

तो यक़ीनन सरे आम लुटेगी तेरी आबरू


जो पलट के भी न देखे तेरे जनाज़े को

उनसे कफ़न की भी न करना तू ज़ुस्तज़ू


जिन्होंने कभी सुनी नहीं सन्नाटे की आवाज़

वो क्या जानेंगे दिल में दबी आरज़ू।



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