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Vihaan Srivastava

Abstract

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Vihaan Srivastava

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संघर्ष एक आधार

संघर्ष एक आधार

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धैर्य साहस शौर्य बल से बना जो सार है।

लक्ष्य की अद्भुत झलक हर राह का आधार है।

शांति व जाग्रति का करे श्रृंगार है

कोशिशों का रूप है वो हिम्मतों का हार है।


असोॅ की भूमि पर हर्षों का जो उत्कर्ष है।

काम उसका है जरूरत नाम में संघर्ष है।


माया का जंजाल है तोड़े मानवता की चादर ओढ़े।

दुःख व संशय दूर भगाते संघॆषीय जीवन के कोड़े।

साधन से बेगैरत होकर दैवियता को नाप चुके जो।

निर्भरता व आत्मसमर्पण भी बतलाते थोड़े -थोड़े ।


मानव जीवन घोड़ा गाड़ी धक्के लगते बारी बारी।

गिरकर उठकर और सम्भलकर बढ़ता रहता हरदम जारी।

उसकी निष्ठा शक्ति है उसकी बिन करमों की है तैयारी

अपने गुण से हैरत मे खुद नतमस्तक क्यो दुनिया सारी।


यश सिद्धी व समृद्धि इससे ही कारक बने है।

है सभी जोड़ता पर सब्र दुःख मारक बने है।

इसका एक आगमन भी लोक से तारक बने है।

आसमा हो या ज़मी हर जगह धारक बने है।

      


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