STORYMIRROR

J P Raghuwanshi

Abstract

2  

J P Raghuwanshi

Abstract

संध्या सुंदरी

संध्या सुंदरी

1 min
139


सूर्य अस्ताचल की ओर चला,

रश्मियां सिंदूरी हो चली।


पक्षी लौट रहे हैं अपने घोसलों की ओर,

गो धूलि की मधुरम बेला हो चली।


थके मादे लोग लौट पड़े अपने घर की ओर,

संध्या होने वाली है।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract