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Chandresh Kumar Chhatlani

Inspirational

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Chandresh Kumar Chhatlani

Inspirational

समय प्रकृति का है

समय प्रकृति का है

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पंछी लौट आते हैं घर,

उन्हें फोन कर बुलाना नहीं पड़ता।

उन्हें भान है समय का,

अनिश्चितता नहीं, है निश्चिंतता।


इंसानों में कहाँ ऐसा होता,

होता है इंतजार

ना आने पर चिंता है घेरती,

चिंता में डूबता है प्यार।


और, कुछ लोग कभी नहीं आते,

बीत जाती हैं कितनी ही रातें।

यादें उनकी आ जाती हैं,

पंछियों की तरह,

वे भी कहां देखती हैं पर,

आने-जाने का समय।


पंछी की तरह क्यों न हम,

समय का मान रखें सदा।

निश्चिंतता से जीएं जीवन,

प्रकृति से सीखें ये कला।


प्रकृति सिखाती है हमें,

नियमों का पालन सदा।

यदि हम भी समझें इसे,

जीवन होगा सरल, सदा।


पंछी लौटते हैं घोंसले,

संध्या की लालिमा में।

हम भी लौटें अपनों के पास,

प्रेम की मधुरिमा में।


समय की पाबंदी सीखें,

प्रकृति के इस पाठ से।

जीवन में लाएं संतुलन,

निश्चिंतता के साथ से।


पंछी और मानव में फर्क,

समय पर घर आने का खेल।

यदि हम भी समझें इसे,

जीवन प्रकृति का हो तालमेल।


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