समुद्र की पुकार
समुद्र की पुकार
विशाल है अनंत है, और दृष्टि पर्यंत है ,
रत्नों का ये खज़ाना है और बड़ा मनमाना है,
है स्वयं पर गुमान भी, पर अंतस वीरान है,
है चीखता पुकारता लहरों से वेग मारता,
की इक बूंद मिठास की खारा समुद्र मांगता।
