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Indu Kashyap

Romance

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Indu Kashyap

Romance

समिधा

समिधा

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रंगों के इस पावन पर्व पर

मेरे हृदय का

सारा आकाश

बृजभूमि हुआ जा रहा है

और

तुम्हारे इन पलाश-वन

नेत्रों का

अबीरी रंग

मुझमें

महारास जाग्रत कर रहा है

तुम्हारी दृष्टि का गुलाल

मुझे लज्जारंग में

भिगोय दे रहा है

प्रिय !

यह

तुम

जो अपनी दृष्टि में नेत्रों में

पलाशों का दहकता

अग्निकुंड

लिये फिरते हो

मेरे अस्तित्व की समिधा

स्नेहपूरित हो

उसमें हव्य होने

को आतुर है।


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