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Kavita Sharrma

Abstract

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Kavita Sharrma

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सलीका

सलीका

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सलीका आया ही नहीं मुझको

जिंदगी जीने का शायद


बड़ी बड़ी बातों को सिखाया था

जीवन में इन्हें अपनाकर सफ़ल होगे


पर जिंदगी जीने का कोई सटीक नियम नहीं

अपनी परिस्थितियों के अनुसार अपना संघर्ष करो


अपने नियम खुद ही तय करो

शायद इसे ही कहते हैं सलीका जीने का

जो जिंदगी भर सीखना पड़ता है।


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