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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

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Vijay Kumar parashar "साखी"

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सलाह देनेवाले

सलाह देनेवाले

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जिन्होंने खुद को नहीं देखा कभी आईने में

वो आदमी ही मुझे मशवरा दे रहे ज़माने में

मत बुझा प्यास तू किसी बुझे मयखाने में

तेरी प्यास बुझेगी साखी खुद के तहखाने में


लोग सलाह देकर लगे रहेंगे तुझे गिराने में

स्वयं हाथ थाम आगे बढ़ाना होगा ज़माने में

लोग बातों का जहर देते रहेंगे तुझे खाने में

पर तुझे रहना चिकना घड़ा हर मायने में

जिंदगी का फूल खिलाना गर ज़माने में

दूर रह फिजूल सलाह देने वाले गाने से

तेरा कल्याण ही होगा जिंदगी के थाने में

तू चलता चल बिना रुके जिंदगी बनाने में



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