सकल जगत यह रंगमंच है
सकल जगत यह रंगमंच है
सकल जगत यह रंगमंच है हम सब हैं अभिनेता,
अवधि पल आने-जाने के प्रभु नियत कर देता।
यह तन-मन तो प्रभु प्रदत्त है जगत है निज परिवार,
व्यवहार आचरण रखें ऐसा हम जिससे प्रेरित हो संसार।
कमल पत्र ज्यों रहे नीर बिच निरासक्त रखिए व्यवहार,
आसक्ति है क्लेश का कारण देती है यह दु:ख अपार।
समझ न आने तक दु:ख आते समझ परम सुख देता,
सकल जगत यह रंगमंच है हम सब हैं अभिनेता,
अवधि पल आने-जाने के प्रभु नियत कर देता।
निर्णय कर्मों की आजादी है जाग्रत रखना है हमें विवेक,
सुख-दु:ख धूप-छांव से रहते समय कभी न रहता एक।
सही-गलत समय आधारित बिन मांगे मिलतीं राय अनेक,
अगणित होते हैं सुख के साथी दु:ख में रहते बस कुछ एक।
तव दु:ख है वह किरण पुंज ज्ञान पराए-अपने का है देता,
सकल जगत यह रंगमंच है हम सब हैं अभिनेता,
अवधि पल आने-जाने के प्रभु नियत कर देता।
कर्म हमारे निज अभिनय है हमने ही करना है निर्णय,
अनुकरणीय चरित्र प्रेरणादायक आचरण करें हम तय।
कर्म पर अधिकार हमारा सत्कर्म के मृदु फल में न संशय,
सच का साथ विरोध गलत का करने में लेश न लाना भय।
नश्वर पंच तत्त्व का तन और कर्म अमरता अर्जित कर लेता,
सकल जगत यह रंगमंच है हम सब हैं अभिनेता,
अवधि पल आने-जाने के प्रभु नियत कर देता।
