STORYMIRROR

Minati Rath

Abstract

3  

Minati Rath

Abstract

सखा

सखा

1 min
224

पांच पतियों की पत्नी नहीं

पांचाली मेरा नाम नहीं

फिर भी जाने किस लिए

मेरे दर्द का अंत नहीं।


पति हैं जो सतपरुष भी हैं

सुख दुःख तो सब उन्हीं से है

फिर भी जाने किस लिए

दिल में दर्द रहते हैं ।


दर्द को बांटने वाले कई

सबकुछ मेरे पास नहीं

फिर भी जाने किस लिए

दिल के करीब है और कोई।


यह कैसा रिश्ता हमारा है ?

सखी जो कहकर पुकारा है

अंजान होकर भी किस लिए

वह ज़िंदगी का सहारा है ?



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract