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ARCHANNAA MISHRAA

Romance

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ARCHANNAA MISHRAA

Romance

सितमग़र इश्क़

सितमग़र इश्क़

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फूल जो भेजे थे उनको इश्क़ में

काटें छोड़ गुलाब सारे चुन लिए ।

चलना तो था इश्क़ में साथ ही 

बीच मझधार में छोड़ सुख सारे चुन लिए ।

तुम यक़ीन करो ना करो 

दर्द हमने तुम्हारे सारे चुन लिये।

उफ़्फ़ तो निकलेगी ना कभी 

इश्क़ का क्या तक़ाज़ा करोगे

दे के चाँदनी तुमको अंधेरे सारे चुन लिये।

वो मूसलसल अड़ा हे ज़िद पे

अदावतें इश्क़ तो आया नहीं 

जो किए हे उसने फ़ैसले हमने सारे चुन लिए ।

मेरा माझी ही जो चला गया 

कोई भी फ़रियाद भी ना सुन सका 

दे के वास्ता इश्क़ का इल्ज़ाम सारे चुन लिए ॥



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