सिसकता सम्बन्ध
सिसकता सम्बन्ध
हमें एक अद्भुत
नायाब तोहफा
मिल गया है !
सम्पूर्ण विश्व में
हमारा जलवा
छा गया है !
हम अंधकारों के
तिमिरों में
अपने पथों को
भूलते जा रहे थे !
मंथर गति से
हम मंजिल को
ढूंढते जा जाते थे !
अब सारे परिदृश्य
बदले -बदले
नजर आते हैं !
क्षितिज के छोर में
अज्ञात को सामने
ले आते हैं !
हम जन्म दिनों की
शुभकामनाओं
सबको पलक
झपकते ही भेज देते हैं !
किसी के कार्यशैली
लेखनी प्रतिभा को
लाइक और कमेंट
कर देते हैं !
हम हर क्षण अपनी
प्रशंसाओं के मालाओं
को अपनी ग्रीवा
में लटकाते हैं !
पर सामने उनके
आने पर
सत्कार की बातें दूर
पहचानने से
भी कतराते हैं !
फेसबुक के पन्नों
तक तो ये सब
लोग ठीक हैं !
अपनों को झेलना
तो दुश्वार हुआ
दूसरों से दूर ही
हम ठीक हैं !
'वसुधेव कुटुम्बकम'
का मंत्र
कहो कहाँ
लुप्त हो गया !
दिल से दिल
को जोड़ ना सके
सम्बन्ध सिसकता
रह गया !
