STORYMIRROR

Manjeet Rohilla

Tragedy

2  

Manjeet Rohilla

Tragedy

सिर का बोझ

सिर का बोझ

1 min
106

वो नन्ही सी जान थी जो थमा दी किसी और के हाथ में ये सोचकर

कि हमारे सिर का बोझ ख़तम हो जाएगा।

उसके भी कुछ ख्वाब होंगे, उसकी भी कुछ ख्वाहिश होंगी,

लेकिन सब राख कर दिए , ये सोचकर कि हमारे सिर का बोझ ख़तम हो जाएगा।

उसको क्या ख़बर थी वो इन चीजों से बेखबर थी।

ऊंची उड़ान तो वो भी करना चाहती होगी,

लेकिन पैर काट दिए ये सोचकर कि हमारे सिर का बोझ ख़तम हो जाएगा

इतनी भी क्या जल्दी थी वो बच्ची बेचारी कल की थी।

कुछ ने कहा कि बड़ी हो गई है, तो हमने भी बाल विवाह कर दिया ये सोचकर कि सिर को बोझ ख़तम हो जाएगा।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy