सिम्पटम ऑफ लव
सिम्पटम ऑफ लव
मेरा दिन तुम्हारी रात का इंतेजार में होता है,
और तुम पूछते हो मुझसे प्यार कैसे होता है ।
क्या करें अब हम कि शिकायतें हैं तुम्हे हमसे,
मनाना भी नहीं आता अगर रूठे कोई हमसे ।
लिखा है हर एक शब्द बस इस दिलासे पर,
पढ़ोगी तो शायद भरोसा करोगी मेरे इरादे पर ।
धोका कहां कभी इश्क़ के इजहार में होता है,
और तुम पूछते हो मुझसे प्यार कैसे होता है ।

