STORYMIRROR

Anonymous Writer

Romance

3  

Anonymous Writer

Romance

सिलसिला

सिलसिला

1 min
201

मजबूरी में तू जब छोड़ कर चला गया

फिर सॉरी बोल कर, क्या सब ठीक हो गया।


गिने है मैने, तू जो ज़ख्म दे गया

भर जाते वो भी, मगर मेरा वक़्त ठहर गया।


शक की नजरों में तू मुझे घेरने लगा

आखिरी दिन बे-नकाब मगर तू हो गया।


माना दिल तेरा बच्चा जरूर था

मगर हवस का शिकार फिर क्यों, करने लग गया।


मैंने तो सात जनम तेरे नाम कर दिए

लेकिन तू किसी और पर अब मरने लग गया।


अपना भी लेती मैं तुझे लेकिन

हर बार का तूने ये सिलसिला बना दिया।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance