Abhishek Singh
Abstract
दर्द भी है जुनून भी है
मिलने का तुझसे सुकून भी है।
लिखूं कुछ और पढूं कुछ
बिछड़ने का तुझसे महरूम भी है।
पर दर्द है जो खरा है
न खुशियों से ये भरा है।
शुद्ध है स्पष्ट है
खुशियों से ही पस्त है
बिछड़ने का ही कष्ट है।
विश्वास
उसकी चुनरी..!
एक रात दे रहा...
वो जो ख़फ़ा ह...
समुद्र एक कवि...
मेरा कुछ सामा...
एक और दामिनी
जय जवान जय कि...
महामारी
कोरोना वारियर...
तुम्हारे कंठ की मधु-बंसरी जलधारा सी चंचल तुम्हारे कंठ की मधु-बंसरी जलधारा सी चंचल
ठीक वैसे ही उनकी पत्नियों को भी वीरांगनाओं के रूप में करें वंदन कहकर वंदे मातरम। ठीक वैसे ही उनकी पत्नियों को भी वीरांगनाओं के रूप में करें वंदन कहकर वंद...
उसके दिल में जोर जोर से गूंज रहा थीं, उसकी चीखें! उसके दिल में जोर जोर से गूंज रहा थीं, उसकी चीखें!
शब्द रूठे अल्फाज खोये; अब यही असमंजस है कि कुछ नया कहां से आए। शब्द रूठे अल्फाज खोये; अब यही असमंजस है कि कुछ नया कहां से आए।
जिंदगी तब रोशन हो गई जब गुरु का ज्ञान मिला, जिंदगी तब रोशन हो गई जब गुरु का ज्ञान मिला,
हो सपनो की चौखट पे, किस्मत की आहट? ना ऐसी फितरत हो, ना ऐसी चाहत। हो सपनो की चौखट पे, किस्मत की आहट? ना ऐसी फितरत हो, ना ऐसी चाहत।
राशन के इंतजार में परिवार बैठा होता है दोस्तों ! तुम ही कहो धूप बड़ी है या भूख। राशन के इंतजार में परिवार बैठा होता है दोस्तों ! तुम ही कहो धूप बड़ी है...
सहमा उपवन छाया कुहास अलि मौन शांत बीता सुहास! सहमा उपवन छाया कुहास अलि मौन शांत बीता सुहास!
प्रेम करो निज कर्म से, किन्तु है कैसा यह प्रेम ? प्रेम करो निज कर्म से, किन्तु है कैसा यह प्रेम ?
फण्ड फाला अंधरुनि माहिती के नाम पे करार देश बिकवाने। फण्ड फाला अंधरुनि माहिती के नाम पे करार देश बिकवाने।
प्यार की शक्ति से बनेगा, स्वर्ग ये सारा संसार। प्यार की शक्ति से बनेगा, स्वर्ग ये सारा संसार।
एक डर है सबके सीने में, जिससे डरता ज़माना है। एक डर है सबके सीने में, जिससे डरता ज़माना है।
जीवन नैया को तुम, भवसागर में आगे बढ़ाओ लक्ष्य पर रखकर कड़ी नजर, पार उतर जाओ। जीवन नैया को तुम, भवसागर में आगे बढ़ाओ लक्ष्य पर रखकर कड़ी नजर, पार उतर जाओ।
बूंदें सावन की रही पुकार घटा घनघोर रिमझिम फुहार। बूंदें सावन की रही पुकार घटा घनघोर रिमझिम फुहार।
आज जब मेरी नादानियों को साज़िशें समझने लगे तो लगता है मैं बड़ी हो गयी। आज जब मेरी नादानियों को साज़िशें समझने लगे तो लगता है मैं बड़ी हो गयी।
साठ सावन बीते,क्या दौरे ज़िंदगी थी! वह बचपन कि सखियां,वह छुपम छुपाई। साठ सावन बीते,क्या दौरे ज़िंदगी थी! वह बचपन कि सखियां,वह छुपम छुपाई।
ओस और रात का जरूर कोई नाता है क्या रात रोती है कोई दुख सताता है ओस और रात का जरूर कोई नाता है क्या रात रोती है कोई दुख सताता है
कीकर केे काँटों सी चुभती हैं, पर सच यही है कि यादें बेशकीमती होती हैं । कीकर केे काँटों सी चुभती हैं, पर सच यही है कि यादें बेशकीमती होती हैं ।
प्यार से ही वो हर बातों को समझाती मेरी मैडम प्यारी सी दुनिया में वो सबसे न्यारी सी। प्यार से ही वो हर बातों को समझाती मेरी मैडम प्यारी सी दुनिया में वो ...
सुना है इमन्यूटी बढ़ती है हंसने से कोरोना क्या बिगाड़ लेगा मेरा सुना है इमन्यूटी बढ़ती है हंसने से कोरोना क्या बिगाड़ लेगा मेरा