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Abhishek Singh

Abstract

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Abhishek Singh

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शुद्ध दर्द !

शुद्ध दर्द !

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दर्द भी है जुनून भी है

मिलने का तुझसे सुकून भी है।


लिखूं कुछ और पढूं कुछ

बिछड़ने का तुझसे महरूम भी है।


पर दर्द है जो खरा है

न खुशियों से ये भरा है।


शुद्ध है स्पष्ट है

खुशियों से ही पस्त है

बिछड़ने का ही कष्ट है।


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