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Archana Kewaliya

Abstract

4.4  

Archana Kewaliya

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शरद

शरद

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मौसम ने बदली है रंगत

गुलाबी सी है ये दस्तक 


बदली बदली सी है फ़िज़ाएं 

महकीं महकीं सी हैं हवाएँ 


ख़ुशनुमा हो रहा माहौल 

रूमानी सी छायी हर ओर 


कुदरत ने ली है अंगड़ाई 

उमस तपन की हुई विदाई 


रातरानी चंपा और चमेली

हरसिंगार की महक है फैली


हल्की सी ठंडक है आई

खिली खिली धूप मुस्काई


चाय कॉफी की गर्म प्याली 

सौंधी सौंधी ख़ुशबू वाली


शरद ऋतु का संदेश है आया 

दिल में ज्यों उल्लास है छाया!


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