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Archana Kewaliya

Abstract


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Archana Kewaliya

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हिंदी दिवस

हिंदी दिवस

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हिंद की संतान हम, शान हमारी हिंदी हैं ।

हिंदवी साम्राज्य हमारा, आन हमारी हिंदी है ।

रग रग में बसी है यह, जान हमारी हिंदी है ।

माँ भारती के माथे का, सुहाग भी तो हिंदी है ।

जन जन की बोलियों का, आधार भी तो हिंदी है ।

देशविदेशों में भी तो, पहचान हमारी हिंदी है ।

क्षेत्रीय भाषाओं की, जननी भी हिंदी है ।

कवियों और लेखकों की, लेखनी भी हिंदी है ।

दिनकर और निराला की, जीवनी भी हिंदी है ।

कश्मीर को कन्याकुमारी से, जोड़े वह भी हिंदी है ।

हर धर्म पंथ में समरसता का, भाव जगाती हिंदी है ।

एकता भाईचारे का, संदेश सुनातीं हिंदी है ।

भाषाएँ हैं कितनी पर, मातृभाषा हिंदी है ।

बिन हिंदी के हम जैसे, माथे से उतरी बिंदी है ।

क्यों मनाये हिंदी दिवस, जब हिंदी सबमें जिंदी हैं ।



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