Suresh Kulkarni
Classics
रंज था रंग नहीं जम रहा इस महफिल में
उनके आनेसे हो गयी है रंगीन ये महफिल
इश्क क्या चीज है समझ गया हूॅं अब मैं
ताजगी रोशनी जो भरी यकायक महफिल में
इनके सिवा ये महफिल थी क्याॅं रोशनी कहाॅं
यही तो है शमा जो जलती है परवाने के लिये।
अर्पण
समझा करो!
मनाऊ कैसे!
होरी
नही भटकना
जिंदगी
तुम
नाम लो !
इशारा करो !
किस्मत!
नहीं, संकीर्ण हो सकती है ईश्वर हां ! ईश्वर सुना तुमने ! प्रेम ईश्वर है। नहीं, संकीर्ण हो सकती है ईश्वर हां ! ईश्वर सुना तुमने ! प्रेम ईश्...
जीवन में जो हैं रहते सतर्क सावधान, होते सफल जग में उठाते नहीं नुकसान। जीवन में जो हैं रहते सतर्क सावधान, होते सफल जग में उठाते नहीं नुकसान।
हाँ तेरे बारे में सोचने लगी हूँ तुझसे बेशुमार प्यार करने लगी हूँ। हाँ तेरे बारे में सोचने लगी हूँ तुझसे बेशुमार प्यार करने लगी हूँ।
जीवन भर करती सेवा है, सब के मन को प्यारी लगती। जीवन भर करती सेवा है, सब के मन को प्यारी लगती।
गूंज रही जहां सारे, उनकी गाथा शान, अति बलशाली थे, आज जगत पहचान।। गूंज रही जहां सारे, उनकी गाथा शान, अति बलशाली थे, आज जगत पहचान।।
इतने दर्द पर भी तेरे सितमगर देख हम कैसे मुस्कुराते हैं। इतने दर्द पर भी तेरे सितमगर देख हम कैसे मुस्कुराते हैं।
यह जिंदगी मिली है बड़ी मुश्किल से कभी तो इसे खुलकर जी लो। यह जिंदगी मिली है बड़ी मुश्किल से कभी तो इसे खुलकर जी लो।
आसाँ नहीं है दिल से उसकी हर निशानी काटना। आसाँ नहीं है दिल से उसकी हर निशानी काटना।
अपने घर से अपने कंधों पर प्यार और सम्मान सहित विदा करना होगा। अपने घर से अपने कंधों पर प्यार और सम्मान सहित विदा करना होगा।
शब्द तो काया है मैं आत्मरूप पृथक निज काया से। शब्द तो काया है मैं आत्मरूप पृथक निज काया से।
तुम्हारे लिए मैं क्या हूँ नहीं जानता मैं तुम नैया का मेरी किनारा रही हो...... तुम्हारे लिए मैं क्या हूँ नहीं जानता मैं तुम नैया का मेरी किनारा रही हो......
इसलिए कभी भी किसी का दिल ना दुखाना, किसी के जज्बात से ना खेलना। इसलिए कभी भी किसी का दिल ना दुखाना, किसी के जज्बात से ना खेलना।
क्योंकि सुबह उठकर फिर काम पर जाना है। क्योंकि सुबह उठकर फिर काम पर जाना है।
कुछ भी हो ना तुम दिल दुखाना किसी का , ना किसी के जज़्बात से खेलना। कुछ भी हो ना तुम दिल दुखाना किसी का , ना किसी के जज़्बात से खेलना।
होगी कब पूर्ण नहीं पता पर सच है मैं स्त्री बनना चाहता हूं। होगी कब पूर्ण नहीं पता पर सच है मैं स्त्री बनना चाहता हूं।
घूट -घूट प्यास होंठों ने, होंठों से पी ली थी, वो सुबह बेहद खूबसूरत आई थी। घूट -घूट प्यास होंठों ने, होंठों से पी ली थी, वो सुबह बेहद खूबसूरत आई थी।
प्रेमाभुषण से अलंकृत इसे हो जाने दो! न रोको...प्रेम प्रसून पर इसे उड़ जाने दो। प्रेमाभुषण से अलंकृत इसे हो जाने दो! न रोको...प्रेम प्रसून पर इसे उड़ जाने द...
हर पल तुमको शीतलता देने की खातिर। जीवन भर जलता जाए वो है बागवान।। हर पल तुमको शीतलता देने की खातिर। जीवन भर जलता जाए वो है बागवान।।
साथ नंद का लाल मुरली बुलाती हमको जिसकी नित्य पनघट पे। साथ नंद का लाल मुरली बुलाती हमको जिसकी नित्य पनघट पे।
पार हो जाये उजालों की धुंधली सी शमां तेरा अक़्स बनकर उभर आये... पार हो जाये उजालों की धुंधली सी शमां तेरा अक़्स बनकर उभर आये...