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Suresh Kulkarni

Classics

4  

Suresh Kulkarni

Classics

शमा

शमा

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रंज था रंग नहीं जम रहा इस महफिल में

उनके आनेसे हो गयी है रंगीन ये महफिल


इश्क क्या चीज है समझ गया हूॅं अब मैं

ताजगी रोशनी जो भरी यकायक महफिल में


इनके सिवा ये महफिल थी क्याॅं रोशनी कहाॅं

यही तो है शमा जो जलती है परवाने के लिये।


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