शिकायत
शिकायत
मुझको समझा रही हो?
मसला उलझा रही हो ।
उलझनें मेरी बढ़ रही हैं
जुल्फ सुलझा रही हो।
नज़रें यूं करके नीचीं
मुझको बहका रही हो।
ऊंच नींच बतलाती हो
शमा को बुझा रही हो।
मैं तुम्हारी हूं कहकर
दिल को बहला रही हो।
यूं देखती हो मुझको
रास्ता कोई सूझा रही हो।
गर मेरी हो नहीं सकती
मुझको क्यों रिझा रही हो?

