शीर्षक:सावन गीत
शीर्षक:सावन गीत
सावन आया पर पिया न आए
कैसे मन को धीर बँधाये..!
मन को कैसे हम समझाए
अँखियाँ मेरी राह निहारे
रो रोकर बस थक थक जाए
बरसात हुई पर पिया न आये
कौन जिया को धीर बँधाये
सावन आया पर पिया न आए
कैसे मन को धीर बँधाये…!
मेरे मन का मीत आये
रातें जाग कर कट जाए
मेरा मन व्याकुल हुआ जाए
जिय की धड़कन बढ़ती जाए
राह निहारते अंखिया दुख जाए
सावन आया पर पिया न आए
कैसे मन को धीर बँधाये…!
मुझ विरहन का मन बड़ा भारी
तुझ बिन तड़फूं मैं दुखियारी
तुझ बिन कोई नजर न भाए
बस तेरी यादें पल पल तड़फाये
सावन आया पर पिया न आए
कैसे मन को धीर बँधाये…!
आंखों से मेरी आंसू बहाते जाए
कैसे इनको समझाया जाए
व्याकुल ये तेरे दरस मिल जाये
पल पल तेरी राह निहारे।
