शहर में गरीब
शहर में गरीब
नायाब फलसफ़ा है जिंदगी
इसे पामाल नहीं कर सकते,
मुकद्दर में जो लिखे थे बवाल..
उन्हें बेमिसाल नहीं कर सकते,
पता न था ये लोग बड़े जालिम हैं
गया था शहर पेट की तपन के लिए,
जिंदा थे तो जिंदगी छीन ली
हाकिम की शोहरत ने कफ़न के लिए।।
