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Gyanu Poetry Official

Tragedy

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Gyanu Poetry Official

Tragedy

शहर में गरीब

शहर में गरीब

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नायाब फलसफ़ा है जिंदगी

इसे पामाल नहीं कर सकते,

मुकद्दर में जो लिखे थे बवाल..

उन्हें बेमिसाल नहीं कर सकते,

पता न था ये लोग बड़े जालिम हैं

गया था शहर पेट की तपन के लिए,

जिंदा थे तो जिंदगी छीन ली

हाकिम की शोहरत ने कफ़न के लिए।।


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