Gyanu Poetry Official
Tragedy
नायाब फलसफ़ा है जिंदगी
इसे पामाल नहीं कर सकते,
मुकद्दर में जो लिखे थे बवाल..
उन्हें बेमिसाल नहीं कर सकते,
पता न था ये लोग बड़े जालिम हैं
गया था शहर पेट की तपन के लिए,
जिंदा थे तो जिंदगी छीन ली
हाकिम की शोहरत ने कफ़न के लिए।।
फौजी कलम
झोले तले बचपन
शहर में गरीब
कुछ मुस्कुराहट मेरी सबके दिल जलाती है इतने पर भी मुझे कहाँ शर्म आती है मेरी आँखों में सू... कुछ मुस्कुराहट मेरी सबके दिल जलाती है इतने पर भी मुझे कहाँ शर्म आती है ...
क्या मंदिर क्या मस्जिद और क्या गुरुद्वारा कोई भी नहीं बच पाया इस व्यापार से छोटे बड़े उत्सव या... क्या मंदिर क्या मस्जिद और क्या गुरुद्वारा कोई भी नहीं बच पाया इस व्यापार से ...
हर कोई है किसी न किसी नशे में चूर! इसकी बेड़ियों में जकड़ा हालात से मजबूर... हर कोई है किसी न किसी नशे में चूर! इसकी बेड़ियों में जकड़ा हालात से मजबूर...
वही गंदगी जो तुमने कभी मेरी झोली में डाली थी मैं हर पल मरती रही और तुम जीते रहे वही गंदगी जो तुमने कभी मेरी झोली में डाली थी मैं हर पल मरती रही ...
चिमनियों से उगलता हुआ धुआं, यही अब तो बादल न्यारे हो गए... चिमनियों से उगलता हुआ धुआं, यही अब तो बादल न्यारे हो गए...
मलहमे इश्क से, जख्मी दिलों को, हर रोज सहलाती हूँ मैं... मलहमे इश्क से, जख्मी दिलों को, हर रोज सहलाती हूँ मैं...
ये नशे की आदत है धीमा जहर युवा पीढ़ी पर ढा रही है कहर... ये नशे की आदत है धीमा जहर युवा पीढ़ी पर ढा रही है कहर...
तूने मेरे सपने को तोड़कर प्यार भरे एहसासों को... तूने मेरे सपने को तोड़कर प्यार भरे एहसासों को...
चिल्लाती रही, भेड़िये ले गए उठा कर उसे बहरों की भीड़ ने उसकी आवाज़ सुनी ना थी सब ने सोचा छोड़ो ... चिल्लाती रही, भेड़िये ले गए उठा कर उसे बहरों की भीड़ ने उसकी आवाज़ सुनी ना थी ...
अंजान तो बेरोजगार है भाई लोग आस पास पड़े ऐसे ही फालतू के सवाल बीनता है। अंजान तो बेरोजगार है भाई लोग आस पास पड़े ऐसे ही फालतू के सवाल बीनता ह...
दान-पूण्य तो खूब हैं करते खुश करते हैं भगवान कितना बदल गया इंसान, माँ-बाप को कुछ ना समझते ... दान-पूण्य तो खूब हैं करते खुश करते हैं भगवान कितना बदल गया इंसान, माँ-ब...
मानवता हुई लापता क्या इन्सानियत भी सो गयी है। मानवता हुई लापता क्या इन्सानियत भी सो गयी है।
माँ पूछो ना उस अंकल को काँपती नहीं क्या रुह उसकी, रात के सन्नाटे में कभी याद आती है जब-जब मेरी बेब... माँ पूछो ना उस अंकल को काँपती नहीं क्या रुह उसकी, रात के सन्नाटे में कभी याद आ...
सूरज की रौशनी से महरूम रहा मेरा घर, घिरा रहा अंधेरों में, जुगनुओं ने साथ निभाया, यही बहुत है... सूरज की रौशनी से महरूम रहा मेरा घर, घिरा रहा अंधेरों में, जुगनुओं ने साथ निभा...
पाया है बुज़ुर्गों ने तज़ुर्बा अभी नया रखने लगे हैं काम वो बस अपने काम से। पाया है बुज़ुर्गों ने तज़ुर्बा अभी नया रखने लगे हैं काम वो बस अपने काम से।
चुपचाप खामोश और वह फिर तत्पर हो जाती है एक और चुभन सहने के लिए। चुपचाप खामोश और वह फिर तत्पर हो जाती है एक और चुभन सहने के लिए।
क्या गुजरती होगी भूख पर भी जब वो कई दिनों से भूखी हड्डियों को खाती होगी ? क्या गुजरती होगी भूख पर भी जब वो कई दिनों से भूखी हड्डियों को खाती होगी ?
अपने पिता को बारिश के इंतजार में उसने बूढ़ा होता देखा था, वो अपने बच्चों को बूढ़ा होता नहीं द... अपने पिता को बारिश के इंतजार में उसने बूढ़ा होता देखा था, वो अपने बच्चों ...
ये माना कि हर तरफ पीने के पानी की कमी है लेकिन जीव पर अत्याचार, बारिश की बेरहमी है यहाँ पर ब... ये माना कि हर तरफ पीने के पानी की कमी है लेकिन जीव पर अत्याचार, बारिश की बेर...
जो देश को कम देशवासियों को ज्यादा चलाते हैं। जो देश को कम देशवासियों को ज्यादा चलाते हैं।