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Gyanu Poetry Official

Inspirational Thriller Others

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फौजी कलम

फौजी कलम

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सरहद की बांहें चूमकर,

हवा का झोंका आया था,

अस्मत वाली वर्दी छू कर,

तन से टकराया था।


फौज वाली दुनिया में,

रोम-रोम हर्षाया था,

मन क्रांति से धधक उठा,

आंखों में तिरंगा छाया था।


शौर्य गाथा सुनी जिनकी,

उनके मध्य मैं आया था,

तापमान था शून्य से नीचे,

लहू ने ज्वाला भड़काया था।


चढ़ता चला गया हिमालय,

दुश्मन भी घबराया था,

गोली लगी तो ली सीने में,

सौ-सौ आतंकी मार गिराया था।


जान नहीं तो क्या हुआ,

देह में लिपट तिरंगा आया था,

ऊपर जाकर देखा मैंने,

फख़्र ने तिलक लगाया था।


एक नहीं हो जन्म अनेक,

गोद मिले भारत मां की,

कलम मिली इस जनम हाथ में,

अभिलाषा हर जनम शहादत की।


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