।।शहीदों का बलिदान।।
।।शहीदों का बलिदान।।
नमन हम आज करते हैं, जान कुर्बान की जिसने।
लुटाया चैन था अपना,लुटा दी ज़िन्दगी जिसने।
तुम्हे हम याद करते है,कठिन संघर्ष था उनका।
लड़े दिन रात फिरंगी से,स्वतंत्रता लक्ष्य था उनका।
दे कर जान खुद अपनी,दी आजादी थी जिसने।
नमन हम आज करते हैं, जान कुर्बान की जिसने।
ढाते जुलुम थे खूब गोरे,स्वतंत्रता के लड़ाकों पर।
बरसाते थे कोड़े पीठ पर,आजादी के दीवानों पर।
चूमा देश की खातिर,फांसी के फंदे को जिसने।
नमन हम आज करते हैं, जान कुर्बान की जिसने।
वीरांगनाएं भी लेकर के,निकली थीं तलवारों को।
वतन के खातिर छोड़ा था, अपने नौनिहालों को।
वतन पर कुर्बान कर दी थी,अपनी ममता को जिसने।
नमन हम आज करते हैं, जान कुर्बान की जिसने।
न भूला है न भूलेगा,वतन कुर्बानी वीरो की।
सहेजे हैं सभी यादें,जिगर में अपने वीरों की।
वतन की खातिर जीवन में,उठाया कष्ट है जिसने।
नमन हम आज करते हैं, जान कुर्बान की जिसने। .
