STORYMIRROR

Mehak Kapoor

Tragedy

3  

Mehak Kapoor

Tragedy

शब्दों द्वारा बलात्कार के विरुध आवाज़

शब्दों द्वारा बलात्कार के विरुध आवाज़

1 min
226

लिखने जा रही हूँ वो बात जो दिल में मेरे आई है

सुनकर एक खबर मेरी रूह डगमगाई है।

एक लड़की ही तुझे जनम देकर इस दुनिया में लाई है

उसकी इज्ज़त साथ खिलवाड़ करके तुझे शरम ना आई है।।

एक लड़की का बलात्कार करके तुने उसकी दुनिया तबाही है

क्यों ये भूल जाता है कि तेरे घर में भी (माँ)आई है।

उस मासूम की जिंदगी बर्बाद करके तुने दोस्तों में लूटी वाह वाही है

दूसरों की बहनों का इस्तेमाल करके 

ये क्यों भूल गया कि तू भी एक बहन का भाई है।।

हे भगवान तेरी दुनिया में लोगों ने कैसी कहर मचाई है

लड़कियाँ अपनी जान के लिए देती दुहाई है।

ना जाने ये लिखते लिखते मेरी आँख क्यों भर आई है

सुनकर एक खबर मेरी रूह डगमगाई है।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy