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Bhavna Thaker

Inspirational

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Bhavna Thaker

Inspirational

शायद एक सपना

शायद एक सपना

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हर गली हर बज़्म से गुज़र कर देखा 

एक अशांत कोहराम से लबरेज़ और

चीखता हुआ माहौल का साम्राज्य

पथराए पड़ा है !


कहीं सियासी आपाधापी, तो कहीं

वहशियत का राज, 

कहीं महँगाई की हाहाकार तो कहीं

कौमी रमखाण !


कहीं पैसों की खनखन का शोर

तो कहीं भूखे पेट की

भड़भड़ाती ज्वाला !


कहने भर को सब सुखी है भीतर

सबके जलता ज्वालामुखी !

 

चलो हाथों में हाथ थामे एक जंजीर

बनाए, बादलों के पार आसमान में

उगते सूरज सा दीप जलाए !


दिल से वैमनस्य का ताप मिटाएं

मानवता का अलख जगाए,

तेरा मेरा कुछ ना रहे अपनेपन की

ज्योत जलाए !


पेड़ो की टहनी पर कुल्हड़ लगाकर

अमन के मीठे घी की लौ जलाए,

शायद कोई सुकून सबर गुलाबी

भोर खिल जाए, हर ज़िंदगी को

रौशन करती।।


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