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Chakori Shukla

Inspirational


4.9  

Chakori Shukla

Inspirational


भोर - सी आस

भोर - सी आस

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इस धूप की तपिश का मुझसे ज़िक्र ना कराओ

रौशनी मिल गयी है, क्या ये कम बात है !


आँधियों के दामन में सिर्फ़ धूल क्यों दिखी ?

बादल पिरो रही हैं, क्या ये कम बात है !


संझा ने आज फ़िर ओढ़ी है रात की चादर

मीठी नींद दे गयी है, क्या ये कम बात है !


रास्तों की चुभन को समेट लो तक़दीर में

राही बना गयी हैं, क्या ये कम बात है !


गीता - क़ुरान में मज़हब ना ढूँढ़ मेरे भाई

सद्गुण सिखा गयी हैं, क्या ये कम बात है !


नदी से सीख ले तू ख़ुद का रास्ता बनाना

इक लक्ष्य दे गयी है, क्या ये कम बात है !


वो विशाल वृक्ष है ख़ुद के ही बल खड़ा हुआ

नाउम्मीद है वो तुझसे, क्या ये कम बात है !


हिमालय की हवाओं में जब आती है सर्द सिहरन

सिमटना सिखा गयी हैं, क्या ये कम बात है !


चलो लौट चलें फ़िर सब लालटेन के उस दौर में

इक लौ जला गयी थी, क्या ये कम बात है !


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