शादी के बाद का प्यार
शादी के बाद का प्यार
सफ़र अनजाना, हमसफ़र भी अनजाना
निकल पड़े है साथ, बिना जाने मंज़िल का ठिकाना।
विश्वास से बने इस रिश्ते में प्यार जताना है
अनजान है सफ़र फिर भी इसे दिल से निभाना है।
शादी के बाद का प्यार होना एक अलग एहसास है
बिना इकरार के भी ये रिश्ता होता बेहद खास है।
एक दूजे के पसंद नापसंद का ख्याल रखना
उनकी छोटी छोटी खास लम्हों को संभाल रखना।
नोकझोंक के बाद एक दूजे को मनाना
अगर गलत हो साथी तो उसे प्यार से समझाना।
चाहे कितनी भी मुश्किल साथ में उसके पार निकल जाना
छोटी ही खुशी मगर साथ में उसका जस्न मनाना।
सात फेरों से बनी सात वचनों के इस प्रीत को
दुआ है यूं ही निभाए हम दो अपनी इस रीत को।

