Dr. Anuradha Jain
Abstract
तारीफ़
मन से निकले
जो सच्ची,
दोस्त बना देती है
ज़माने को,
यही
जो झूठ हो तो
दीवार भी बना
सकती है।
सच को खूबसूरत
लिबासों की
वैसे तो ज़रूरत
नहीं होती
उल्टा ये तो
नग्न भी
सराहा जाता है।
कब तक
है आज जिंदगी
म।क
सुहानी
एक गूंज
बंद-बंद
आज
आओ बदले
शांति
ऐसा यदि हो जा...
जीवन में जब से हुआ,में समझदार तब से अपनों से मिलने लगा,दुत्कार। जीवन में जब से हुआ,में समझदार तब से अपनों से मिलने लगा,दुत्कार।
याद रहेगा बस वही, जो पावन साहित्य। लोगों के दिल में सदा, है बन चमके आदित्य।। याद रहेगा बस वही, जो पावन साहित्य। लोगों के दिल में सदा, है बन चमके आदित्य।।
नरान्तक और बिन्दुमती ने स्वर्ग की गति थी पाई। नरान्तक और बिन्दुमती ने स्वर्ग की गति थी पाई।
अपने सतीत्व के लिए अग्नि परीक्षा देती हैं। न जाने कैसी होती हैं ये स्त्रियां ? अपने सतीत्व के लिए अग्नि परीक्षा देती हैं। न जाने कैसी होती हैं ये स्त्र...
तुम्हारा खड़ा होना, मेरे मन की चौखट पर और मेरे इंतजार का बिखरना, तुम्हारे पैरों के नीचे एक ... तुम्हारा खड़ा होना, मेरे मन की चौखट पर और मेरे इंतजार का बिखरना, तुम्हा...
किसने आपको हक दिया है कुछ भी कह लेने का किसने आपको हक दिया है कुछ भी कह लेने का
डरना छोड़ो अब हौसला भरो, लड़ो, कब तक मुँह चुराओगे। डरना छोड़ो अब हौसला भरो, लड़ो, कब तक मुँह चुराओगे।
रावण को देखा, फिर शीश झुकाया उसने बड़े प्यार से मुझे उठाया गले लगाया, मेरी पीठ थपथपाया रावण को देखा, फिर शीश झुकाया उसने बड़े प्यार से मुझे उठाया गले लगाया, मेरी ...
गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक महसूस किय गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक ...
हमने अंग्रेज़ी में सोचना सीख लिया है, पर हम महसूस हिंदुस्तानी में करते हैं. हमने अंग्रेज़ी में सोचना सीख लिया है, पर हम महसूस हिंदुस्तानी में करते हैं.
थम सी जाती ज़िन्दगी और समय चक्र मुस्कुराता कहीं थम सी जाती ज़िन्दगी और समय चक्र मुस्कुराता कहीं
सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं
शब्दों की अपनी गरिमा है, भावों की अनुपम महिमा है। मृदु मंत्रों के पुष्पहार से, अनघ हृद... शब्दों की अपनी गरिमा है, भावों की अनुपम महिमा है। मृदु मंत्रों के पुष्...
हल्दीघाटी पावन धाम पे हर कोई शीश नवाता है हल्दीघाटी पावन धाम पे हर कोई शीश नवाता है
बल्कि जमाने के साथ, एक दिन खुद बदल जाओगे। बल्कि जमाने के साथ, एक दिन खुद बदल जाओगे।
ममता कातर गाय दिखा गयी एक राह रथ के आगे खड़ी हो बता गयी थी चाह ममता कातर गाय दिखा गयी एक राह रथ के आगे खड़ी हो बता गयी थी चाह
शृंगार बालों का हुआ है, झूलती है चोटियाँ। चकले थिरक जाते खुशी से, बेलती जब बेटियाँ। शृंगार बालों का हुआ है, झूलती है चोटियाँ। चकले थिरक जाते खुशी से, बेलती जब बे...
जीवन बदल दिया । शब्द नाद ने ब्रह्मांड को गुंजित कर दिया । जीवन बदल दिया । शब्द नाद ने ब्रह्मांड को गुंजित कर दिया ।
मैं कहाँ ले जाऊँ मन मेरा... तुझसे बिछड़ने को तैयार नही... मैं कहाँ ले जाऊँ मन मेरा... तुझसे बिछड़ने को तैयार नही...
ममता की प्रतिमूर्ति ऐसी, देवी छोटी पड़ जाती है, धरती पे माँ कहलाती है। ममता की प्रतिमूर्ति ऐसी, देवी छोटी पड़ जाती है, धरती पे माँ कहलाती है।