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Dr. Anuradha Jain

Abstract

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Dr. Anuradha Jain

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सच

सच

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तारीफ़ 

मन से निकले

जो सच्ची,

तारीफ़ 

दोस्त बना देती है

ज़माने को,

यही 

जो झूठ हो तो

दीवार भी बना 

सकती है। 

सच को खूबसूरत 

लिबासों की

वैसे तो ज़रूरत 

नहीं होती

उल्टा ये तो

नग्न भी

सराहा जाता है।



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