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pawan Mohakul

Abstract Tragedy Classics

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pawan Mohakul

Abstract Tragedy Classics

सच से मिलना

सच से मिलना

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जब तुम मुझे जवाब दे सको,

तब तुम मुझसे सवाल करना।


जब लगे तुम पूर्णत: सही हो,

तब मुझसे गलत करार करना।


अजीब शौक है बिछड़ने का,

मिल लो फिर हलाल करना।


हां तुम्हे ये बखूबी आता है,

आग लगाकर पानी करना।


नींद का असर है आंखों पर,

ख्वाब टूटे तो सच से मिलना।


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