सब्र
सब्र
सब्र रखूँ या बता दूँ..... जा रही हूँ मैं सबसे दूर
यही बात मैं खुद को मनवा लूँ......
यकीं ना हो रहा....... मन क्यों मान ना रहा
मैं जा रही सबसे दूर...... ये मेरा दिल क्यों मान ना रहा 😔अपनो से मैं दूर कहीं.... जी पाऊँगी या नहीं
मेरा दिल यही सोच धड़कना कम कर दिया है
चल रही साँसे पर ..... अपनो से दूर
दम घुट सा रहा है 🧐
एक चाहत थी मुझे नौकरी की
पर ये मेरे सारे अपनो से मुझे दूर कर रही.....
सपनो को पूरा करने...... अब अपनो से ही
जुदा हुए जा रही....... 🥲
आँखे नम और जुबाँ है खामोश
धड़कने चल रही थोड़ा मध्यम
दिमाग भी है जरा शांत
सब्र रखूं या खुद को मना लूँ
अब इस दुनिया की उलझन से
मैं खुद को संभाल लूँ
राह बिछे हज़ारों काँटे... उन काँटों से खुद को पार लगा लूँ
अंधेरी सी डगर उसपे कुछ रौशनी जला लूँ
अब खुद को इस जमाने के काबिल जरा बना लू.....
✍️ वर्षा रानी दिवाकर 🥰
