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Amit Kumar

Abstract

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Amit Kumar

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सबका मालिक

सबका मालिक

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अभिव्यक्ति जो भी हो

आधार नही भटकना चाहिए

कौम कोई भी हो


इंसान नहीं भटकना चाहिए

इंसान कोई भी हो

इंसानियत नहीं मरनी चाहिए

आटे में नमक चलता है


नमक में आटा नहीं चलता है

ऐसा कौन सा रिश्ता है

जो सिर्फ मुहब्बत से चलता है

गाड़ी कोई भी हो


दो चक्कों पर चलती है

कुछ भावनाओं को मरना है

तभी कुछ भावनाएं ज़िंदा है

धर्म अनेक हो सकते है


मक़सद सबका एक है

शिरडी के साईं कह गये

सबका मालिक एक है !


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